कांग्रेस ने सुविधानुसार संविधान को कुचला... CEC नियुक्ति मामले में धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल पर साधा निशाना
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को नए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की असहमति पर कहा कि उनकी आपत्तियां 'विवाद पैदा करने और दुष्प्रचार करने' का प्रयास हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "कांग्रेस पार्टी ने अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए अपने सुविधानुसार संविधान को कुचला है. कांग्रेस ने बाबा साहेब अंबेडकर का उपहास और अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा, फिर भी कांग्रेस के 'युवराज' में बाबा साहेब और हमारे संस्थापक नेताओं के आदर्शों को कायम रखने का दुस्साहस है."
उन्होंने लिखा, "राहुल गांधी का प्रयास मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति पर विवाद पैदा करना और दुष्प्रचार करना है. क्या राहुल गांधी भूल गए हैं कि कांग्रेस शासन के दौरान चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कैसे की जाती थी? दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने चयन प्रणाली में सुधार के लिए कुछ क्यों नहीं किया?"
शिक्षा मंत्री ने कहा, "वास्तव में यह पहली बार है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति संसद में पारित कानून के माध्यम से की गई है. यह हमारी सरकार है जिसने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक संयुक्त प्रणाली बनाई है, जिसमें विपक्ष के नेता भी शामिल हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बिना किसी नियम/कानून के उल्लंघन के भी रोने-धोने वाले बच्चों की तरह काम कर रहे हैं."
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने असहमति के नोट में मोदी सरकार पर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करने का आरोप लगाया है. उन्होंने सीईसी के लिए गठित चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले की आलोचना की.
केंद्र सरकार ने सोमवार देर रात ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया. यह नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक के बाद की गई. नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक होगा. उनकी देखरेख में इस साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव और अगले साल बंगाल, असम और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव होंगे.
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्तियों के खिलाफ याचिकाओं पर 19 फरवरी को "प्राथमिकता के आधार" पर विचार करेगा.
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