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"ना बिलजी बिल, ना बस किराया" : कर्नाटक में कांग्रेस का वादा उसी पर ही पड़ रहा भारी?

कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार को शपथ लिए सात दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है. आम जनता को उम्मीद थी कि नई सरकार बनते ही उनसे किए वादों को तुरंत ही पूरा किया जाएगा. लेकिन अभी तक कांग्रेस ने घोषणा पत्र में किए गए अहम वादों को पूरा नहीं किया है. इन वादों में खास तौर पर 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने और राज्य में महिलाओं को मुफ्त में बस की सवारी कराने जैसे वादे अहम हैं. सरकार की तरफ से हो रही इस देरी का असर अब आम जनता पर दिखने लगा है. आम जनता नई सरकार के सत्ता में आने के बाद उसे घोषणापत्र में किए गए वादों को याद दिला रही है. साथ ही उम्मीद कर रही है वो अपने वादों को जल्द से जल्द पूरा करेंगे.

"आम जनता बिल चुकाने से कर रही है इनकार"

सोमवार को कर्नाटक से आए एक वीडियो में एक महिला बस में टिकट लेने से यह कहते हुए इनकार करते हुए दिख रही है कि नई सरकार ने वादा किया था कि हमें किराया नहीं देना होगा. वहीं, एक अन्य वीडियो में कुछ लोग बिजली विभाग से आए कर्मचारियों को बिल देने से यह कहते हुए मना करते दिख रहे हैं कि हमें चुनाव के समय कहा गया था कि सत्ता में आते ही 200 यूनिट तक का बिल नहीं लेंगे. इसपर बिजली कर्मचारी उन्हें ये कह रहे हैं कि हमें अभी सरकार की तरफ से कोई आदेश नहीं आया है. इसलिए अभी तो आपको बिल देना होगा. लेकिन वहां मौजूद लोग फिर भी बिल देने को राजी नहीं होते हैं. 

BJP भी मैदान में उतरी

कांग्रेस द्वारा घोषणापत्र में किए गए वादों को सत्ता में आने के सात दिन बाद भी पूरा ना किए जाने को विपक्ष में बैठी बीजेपी मुद्दा बनाते दिख रही है. बीजेपी के नेता रेणुकाचार्य ने कुछ महिलाओं से कहा कि आपको तो याद ही होगा ना कि चुनाव के दौरान सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने आपसे क्या वादा किया था. उन्होंने आपसे वादा किया था चाहे आप अपने ससुराल जाएं या फिर मायका या फिर राज्य में कहीं और. आपसे बस में टिकट नहीं लिया जाएगा.

सिद्धारमैया सरकार एक्शन में

हालांकि, राज्य में इस अफरा-तफरी से परेशान सीएम सिद्धरमैया जल्द से जल्द इन वादों को पूरा करने की रूपरेखा बनाते दिखे. कांग्रेस का वादा है 200 यूनिट मुफ्त बिजली, परिवार की महिला मुखिया को 2000 रुपये हर महीने, बेरोजगार युवाओं को 3000 रुपये हर महीने और गरीब परिवारों को 10-10 किलो मुफ्त अनाज. बता दें कि मुफ्त की रेवड़ी पर सरकार को हर साल 50 हज़ार करोड़ रुपये का भार पड़ेगा. ये एक बड़ी रकम है, ऐसे में जैसे जैसे देर हो रही है सरकार की नीयत पर शक बढ़ता जा रहा है. 



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