महाराष्ट्र: पानी लाने के लिए मां को तय करना पड़ता था लंबा रास्ता, नौवीं के छात्र ने घर के पास खोदा कुआं
महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक महिला को एक मटका पानी लाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता था जिसे देखकर नौवीं कक्षा में पढ़ने वाला उनका बेटा काफी परेशान हुआ और मां की सहूलियत के लिए उसने घर के पास एक कुआं खोद दिया.
प्रणव सालकार की यह पहल केलवे के पास स्थित उसके आदिवासी गांव धावन्गे पाडा में चर्चा का विषय बन गई और यह खबर जल्द ही गांव की सीमा से बाहर चली गई और उसे आज का ‘श्रवणबाल' कहा जाने लगा.सालकर को जिला परिषद के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को सम्मानित किया और उसके अनुकरणीय कार्य के लिए उसे 11,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी.
अधिकारियों ने बताया कि सालकर यह नहीं देख सका कि उसकी मां को परिवार के लिए पानी लाने के लिए पैदल चलकर दूर जाना पड़ता है और उसने उनके लिए कुआं खोद दिया. सालकर को सम्मानित करने के दौरान जिला परिषद अध्यक्ष प्रकाश निकम ने कहा कि लड़के की अपनी मां के प्रति प्रतिबद्धता की सभी को सराहना करनी चाहिए और यह दूसरों के लिए एक सीख होनी चाहिए.
निकम ने यह भी आदेश दिया कि सालकर के परिवार को शबरी आवास योजना के तहत एक घर स्वीकृत किया जाए. इस योजना के तहत मिट्टी के घरों में रहने वाले आदिवासियों को पक्के मकान दिए जाते हैं. जिला परिषद अध्यक्ष ने सालकर को आज का “श्रवणबाल” करार दिया. उन्होंने यह संदर्भ रामायण के श्रवण कुमार से दिया है जिन्होंने दृष्टिबाधित अपने माता-पिता को अपने कंधे पर बैठाकर तीर्थयात्रा कराई थी.
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