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प्रयागराज में VHP आज से कर रही है धर्म संसद, मोहन भागवत से मिलेंगे सीएम योगी

प्रयागराज में 28, 29 और 30 जनवरी को हुए संतों की धर्मसभा के बाद स्वामी स्वरूपानंद शंकराचार्य ने घोषणा की है कि संत समाज 21 फरवरी से अयोध्या में मंदिर निर्माण शुरू कर देगा. कहा गया है कि इस दिन मंदिर परिसर की पहली ईंट रखी जाएगी. इसी बैकड्रॉप में आज से विश्व हिंदू परिषद कुंभ मेले के परिसर में ही अपना धर्मसंसद कर रहा है. गुरुवार से वीएचपी का धर्मसंसद शुरू हो रहा है, जो दो दिन तक चलेगा. ये संसद वीएचपी कैंप में होगा. इस संसद का मुख्य मुद्दा राम मंदिर निर्माण ही है. इसमें राम मंदिर के निर्माण की हालिया स्थिति, केंद्र का रुख और उसकी अर्जी और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हो सकती है. यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रमुख मोहन भागवत के साथ-साथ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आएंगे. यहां योगी आदित्यनाथ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सहित कई बड़े संतों से मुलाकात करेंगे. इस धर्मसंसद में भागवत और योगी के अलावा राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास महाराज, न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष डा. रामविलास वेदांती, वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वीएस कोकजे, बाबा रामदेव और यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या भी शामिल होंगे. हालांकि, अखाड़ा परिषद ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया है. फिलहाल राम मंदिर पर माहौल बिल्कुल गरमाया हुआ है. वीएचपी पिछले कुछ महीनों से सरकार पर हमलावर है. शिवसेना और आरएसएस भी जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान चाहती हैं. वहीं, लोकसभा चुनाव के पहले मोदी सरकार ने मंदिर को लेकर बड़ा दांव खेला है. सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है कि राम मंदिर परिसर में जो जमीन विवादित नहीं है, वो उनके मालिकों को लौटा दी जाए. सरकार दिखाना चाहती है कि वो गैरविवादित जमीन पर मंदिर निर्माण शुरू करवा सकती है. लेकिन उसकी इस अर्जी पर निर्मोही अखाड़ा और रामलला के पक्षकार महंत धर्मदास ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि सरकार पहले इसपर अपनी मंशा जाहिर करे.

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